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GS-1 • 2024
15 marks • 250 words

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15 Marks • 250 Words
भारतीय समाज अपनी विशिष्टता और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। चर्चा कीजिए।
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Syllabus: Salient features of Indian Society and culture. 15 marks 250 words 7 min focus timer
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HI
परिचय (Introduction)

1 भूमिका

भारतीय समाज विश्व की सबसे प्राचीन, निरंतर और बहुरंगी सामाजिक व्यवस्थाओं में से एक है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ अनेक भाषाएँ, धर्म, जातियाँ, जनजातियाँ, परंपराएँ, रीति-रिवाज, भोजन, वेशभूषा और जीवन-शैलियाँ एक साथ अस्तित्व में रहती हैं।

इसी कारण भारतीय समाज को “विविधता में एकता” का प्रतीक माना जाता है। यहाँ विविधता विभाजन का कारण न होकर सामाजिक सह-अस्तित्व, समन्वय और सांस्कृतिक समृद्धि का आधार बनती है। यही भारतीय समाज की विशिष्टता और सांस्कृतिक विविधता है।

मुख्य भाग: भारतीय समाज की विशिष्टता और सांस्कृतिक विविधता

फ्लो चार्ट: भारतीय समाज की संरचना

भारतीय समाज

विशिष्टता

प्राचीनता,
निरंतरता,
समन्वयशीलता

सांस्कृतिक विविधता

भाषा, धर्म,
कला, भोजन,
वेशभूषा

एकता

संविधान,
लोकतंत्र,
साझा राष्ट्रीयता

मुख्य विचार: भारतीय समाज अनेकताओं को स्वीकार कर उन्हें एक साझा सांस्कृतिक पहचान में जोड़ता है। 

1. भारतीय समाज की विशिष्टता

भारतीय समाज की विशिष्टता इसकी प्राचीनता, निरंतरता, सहिष्णुता और समन्वय की क्षमता में दिखाई देती है। यहाँ वैदिक, बौद्ध, जैन, इस्लामी, सूफी, भक्ति, सिख और आधुनिक लोकतांत्रिक परंपराओं ने मिलकर एक मिश्रित सांस्कृतिक स्वरूप बनाया है।

भारत ने बाहरी प्रभावों को केवल अस्वीकार नहीं किया, बल्कि उन्हें अपनी परंपरा के अनुसार आत्मसात भी किया। यही कारण है कि भारतीय समाज स्थिर होते हुए भी परिवर्तनशील और परंपरागत होते हुए भी आधुनिक है।

2. सांस्कृतिक विविधता के प्रमुख आयाम

  • भाषाई विविधता: भारत में अनेक भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं, जो क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करती हैं।

  • धार्मिक विविधता: हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन, पारसी आदि समुदाय साथ रहते हैं।

  • सामाजिक विविधता: जाति, जनजाति, ग्रामीण-शहरी और क्षेत्रीय समूहों की अलग-अलग सामाजिक परंपराएँ हैं।

  • कला और लोक-संस्कृति: शास्त्रीय नृत्य, लोकगीत, लोकनृत्य, चित्रकला और हस्तशिल्प भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाते हैं।

  • भोजन और वेशभूषा: प्रत्येक क्षेत्र की जलवायु, इतिहास और सामाजिक जीवन के अनुसार भोजन व परिधान अलग-अलग हैं।

3. विविधता में एकता

भारतीय समाज में विविधता के बावजूद एक मजबूत एकता दिखाई देती है। यह एकता साझे इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन, संविधान, लोकतंत्र, राष्ट्रीय प्रतीकों और सह-अस्तित्व की भावना से निर्मित होती है।

दीपावली, ईद, क्रिसमस, गुरु पर्व, बुद्ध पूर्णिमा, पोंगल, बिहू, ओणम और होली जैसे त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक मेल-जोल के अवसर भी हैं।

चुनौतियाँ और वर्तमान संदर्भ

भारतीय समाज की विविधता उसकी शक्ति है, लेकिन कभी-कभी यही विविधता जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद, सांप्रदायिकता और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियों का रूप भी ले सकती है। इसलिए विविधता को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि समानता और न्याय के साथ जोड़कर देखना आवश्यक है।

  • संवैधानिक मूल्यों का प्रसार किया जाए।

  • सहिष्णुता और संवाद की संस्कृति मजबूत की जाए।

  • सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित किए जाएँ।

  • क्षेत्रीय भाषाओं और लोक-संस्कृतियों का संरक्षण किया जाए।

  • शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक सम्मान की भावना विकसित की जाए।

निष्कर्ष

इस प्रकार, भारतीय समाज अपनी विशिष्टता और सांस्कृतिक विविधता के कारण विश्व में अलग पहचान रखता है। इसकी शक्ति इस बात में है कि यह अनेक भाषाओं, धर्मों, जातीय समूहों और जीवन-शैलियों को एक साझा सभ्यतागत धारा में जोड़ता है।

अतः भारतीय समाज को समझने के लिए केवल उसकी विविधता को देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस एकात्म भाव को भी समझना आवश्यक है, जो विविधताओं के बीच भी भारतीयता को जीवित रखता है।

मुख्य विचार: भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सभ्यतागत शक्ति और राष्ट्रीय एकता का आधार है।

निष्कर्ष (Conclusion)

 

Syllabus Anchoring
General Studies-I → Indian Society and Culture
सामान्य अध्ययन-I → भारतीय समाज और संस्कृति
Salient features of Indian Society and culture.
भारतीय समाज और संस्कृति की मुख्य विशेषताएं।
Asked in: 2024 (1 PYQ)
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