UPSC मुख्य परीक्षा · 150 शब्द
मौर्य इतिहास के पुनर्निर्माण में अशोक के अभिलेखों के महत्त्व का विश्लेषण कीजिए।
भूमिका
अशोक के शैल, स्तंभ और गुहा अभिलेख मौर्य साम्राज्य के पुनर्निर्माण हेतु उपलब्ध सबसे प्राचीन, व्यापक, तिथिक्रम-निर्धारण योग्य और लगभग समकालीन प्राथमिक स्रोत हैं।
प्रमुख योगदान
- राजनीतिक भूगोल: कंधार और शाहबाजगढ़ी से धौली तथा मास्की तक इनका वितरण साम्राज्य-विस्तार, सीमांत क्षेत्रों और प्रादेशिक केंद्रों को रेखांकित करता है।
- प्रशासन: राजुक, युक्त, प्रादेशिक और धम्म-महामात्र प्रांतीय शासन, अधिकारियों के दौरों, न्याय तथा लोककल्याण की जानकारी देते हैं।
- ऐतिहासिक घटनाएँ: वृहद् शिलालेख XIII कलिंग युद्ध, अशोक के पश्चात्ताप तथा भेरीघोष से धम्मविजय की ओर परिवर्तन को दर्ज करता है।
- राज्य एवं समाज: अभिलेख पितृवत् राजसत्ता, धार्मिक सहिष्णुता, अहिंसा, सामाजिक नैतिकता, चिकित्सा सुविधाओं, कुओं और सड़कों को उजागर करते हैं।
- भाषा एवं कूटनीति: ब्राह्मी, खरोष्ठी, यूनानी और अरामाइक रूप भाषायी विविधता तथा अंतर-सांस्कृतिक संपर्क दर्शाते हैं। दक्षिणी राज्यों एवं यूनानी शासकों के उल्लेख कालक्रम-निर्धारण में सहायक हैं। मास्की अभिलेख ‘देवानांप्रिय प्रियदर्शी’ की पहचान अशोक से करता है।
निष्कर्ष
पुरातत्त्व, सिक्कों और साहित्यिक स्रोतों से पुष्टि किए जाने पर अशोक के अभिलेख मौर्य इतिहास के संतुलित पुनर्निर्माण के लिए अपरिहार्य सिद्ध होते हैं।