मध्य भारत के चंदेल शासकों के अधीन विकसित खजुराहो की कला भारतीय मूर्तिकला के चरमोत्कर्ष का प्रतिनिधित्व करती है। यहाँ के मूर्तिकारों ने पत्थर की जड़ता को तोड़कर उसमें मानवीय भावनाओं, गतिशीलता और 'लचकदार ओज' का संचार किया है।
संक्षेप में, चंदेल मूर्तिकारों ने निर्जीव पत्थरों में प्राण फूँककर उन्हें मानवीय ऊर्जा और सौंदर्य के उत्सव में बदल दिया। उनकी कला दृष्टि ने खजुराहो को विश्व की सबसे जीवंत मूर्तिकला विरासत के रूप में प्रतिष्ठित किया है।