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GS-5 • 2025
15 marks • 250 words

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15 Marks • 250 Words
भारतीय संविधान में केन्द्र-राज्य संबंधों से सम्बन्धित संवैधानिक प्रावधानों का वर्णन करते हुए उत्तर प्रदेश के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए।
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Syllabus: Political System of UP: Governance, Governor, Chief Minister, Council of Ministers, State Assembly and State Council, Center-State Relation. 15 marks 250 words 7 min focus timer
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Model Answer Framework
हिंदी मॉडल उत्तर
HI
परिचय (Introduction)

1 भूमिका

भारतीय संविधान एक सशक्त एकात्मक प्रवृत्ति वाली संघीय व्यवस्था की स्थापना करता है। अनुच्छेद 1 भारत को “राज्यों का संघ” कहता है, जो इस विचार को दर्शाता है कि भारतीय संघ केवल राज्यों के बीच हुआ कोई समझौता नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता को बनाए रखते हुए क्षेत्रीय स्वायत्तता सुनिश्चित करने वाली संवैधानिक व्यवस्था है।

केन्द्र-राज्य संबंध भारतीय संघवाद की रीढ़ हैं। इन संबंधों को मुख्य रूप से तीन भागों में व्यवस्थित किया गया है: विधायी संबंध, प्रशासनिक संबंध और वित्तीय संबंध। इनका महत्व उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य के संदर्भ में और भी बढ़ जाता है, जहाँ सुशासन, कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और संतुलित विकास के लिए संघ और राज्य के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है।

मुख्य भाग: केन्द्र-राज्य संबंधों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

फ्लो चार्ट: भारत में केन्द्र-राज्य संबंध

केन्द्र-राज्य संबंध

विधायी संबंध

अनुच्छेद 245–255
सातवीं अनुसूची
संघ, राज्य एवं समवर्ती सूची

प्रशासनिक संबंध

अनुच्छेद 256–263
केन्द्र के निर्देश
अंतर्राज्यीय परिषद

वित्तीय संबंध

अनुच्छेद 268–293
करों का वितरण
वित्त आयोग

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में प्रासंगिकता: सुशासन, कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, कृषि, आधारभूत संरचना, कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास। 

1. विधायी संबंध

विधायी संबंध संविधान के अनुच्छेद 245 से 255 के अंतर्गत दिए गए हैं। अनुच्छेद 246 और सातवीं अनुसूची विधायी विषयों को संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में विभाजित करते हैं।

संसद संघ सूची के विषयों पर कानून बनाती है, जबकि राज्य विधानमंडल राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाते हैं। समवर्ती सूची के विषयों पर केन्द्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन टकराव की स्थिति में सामान्यतः अनुच्छेद 254 के अंतर्गत केन्द्रीय कानून को प्रधानता मिलती है। अवशिष्ट शक्तियाँ अनुच्छेद 248 के तहत संसद में निहित हैं।

2. प्रशासनिक संबंध

प्रशासनिक संबंध अनुच्छेद 256 से 263 के अंतर्गत आते हैं। ये प्रावधान सुनिश्चित करते हैं कि राज्य संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन करें और किसी राज्य की कार्यपालिका शक्ति संघ की कार्यपालिका शक्ति में बाधा न बने।

केन्द्र कुछ मामलों में राज्यों को निर्देश जारी कर सकता है। अंतर्राज्यीय परिषद, क्षेत्रीय परिषदें और अखिल भारतीय सेवाएँ समन्वय, प्रशासनिक एकरूपता और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देती हैं।

3. वित्तीय संबंध

वित्तीय संबंध अनुच्छेद 268 से 293 के अंतर्गत वर्णित हैं। ये प्रावधान कराधान शक्तियों, करों के वितरण, अनुदान-सहायता और राज्यों की उधार लेने की शक्तियों को नियंत्रित करते हैं।

अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग केन्द्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण की सिफारिश करता है। अनुच्छेद 279A GST परिषद का प्रावधान करता है, जो भारत में सहकारी संघवाद का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में प्रासंगिकता

उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है और इसकी विकास संबंधी आवश्यकताएँ अत्यंत व्यापक हैं। इसलिए राज्य के सुशासन, कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए केन्द्र-राज्य संबंध अत्यंत प्रासंगिक हैं।

  • कल्याणकारी योजनाएँ: आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा से संबंधित केन्द्रीय योजनाएँ राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन पर निर्भर करती हैं।

  • कृषि: न्यूनतम समर्थन मूल्य, फसल बीमा, उर्वरक सब्सिडी और सिंचाई से संबंधित नीतियों में केन्द्र-राज्य समन्वय आवश्यक है।

  • आधारभूत संरचना: एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डे, रेलवे, औद्योगिक गलियारे और रक्षा गलियारे के विकास में केन्द्र और राज्य दोनों का सहयोग आवश्यक है।

  • कानून-व्यवस्था: पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य सूची के विषय हैं, लेकिन आंतरिक सुरक्षा के लिए संघ के साथ समन्वय आवश्यक होता है।

  • वित्तीय सहायता: करों का हस्तांतरण, अनुदान-सहायता और वित्त आयोग के अंतरण क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

निष्कर्ष

इस प्रकार, केन्द्र-राज्य संबंधों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान राष्ट्रीय एकता को बनाए रखते हुए राज्य स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए एक संतुलित ढाँचा प्रदान करते हैं। विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाएँ मिलकर भारतीय संघवाद को लचीला और कार्यात्मक बनाती हैं।

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में, प्रभावी शासन, कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, आधारभूत संरचना के विकास, कृषि सहायता और क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने के लिए सौहार्दपूर्ण केन्द्र-राज्य संबंध अत्यंत आवश्यक हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश के विकास की सफलता सहकारी संघवाद की भावना से गहराई से जुड़ी हुई है।

मुख्य विचार: संतुलित विकास और सफल भारतीय संघवाद के लिए सशक्त केन्द्र और सक्षम राज्य दोनों आवश्यक हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

 

Syllabus Anchoring
General Studies - V (Uttar Pradesh Special) → Polity
सामान्य अध्ययन - V (उत्तर प्रदेश विशेष) पाठ्यक्रम → राजव्यवस्था
Political System of UP: Governance, Governor, Chief Minister, Council of Ministers, State Assembly and State Council, Center-State Relation.
यूपी की राजनीतिक प्रणाली: शासन, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद, राज्य विधानसभा और राज्य विधान परिषद, केंद्र-राज्य संबंध।
Asked in: 2025 (1 PYQ)
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