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UPPSC
GS-5 • 2025
15 marks • 250 words

GS-5 • 2025

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15 Marks • 250 Words
“नागरिक चार्टर (Citizen Charter) नागरिकों का, नागरिकों के द्वारा और नागरिकों के लिए होना चाहिए।” उत्तर प्रदेश के विशेष संदर्भ में विवेचना कीजिए।
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Syllabus: Good Governance, Eradication of Corruption, Lokayukta, Citizen Charters, E-Governance, Right to Information, Redressal Policy. 15 marks 250 words 7 min focus timer
Timer: 07:00
Model Answer Framework
हिंदी मॉडल उत्तर
HI
परिचय (Introduction)

1 भूमिका

नागरिक चार्टर किसी सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा नागरिकों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं के मानक, समय-सीमा, पारदर्शिता और जवाबदेही से संबंधित एक लिखित प्रतिबद्धता है। यह सुशासन का एक महत्त्वपूर्ण साधन है, क्योंकि यह प्रशासन को शासक-केंद्रित व्यवस्था से नागरिक-केंद्रित सेवा व्यवस्था में परिवर्तित करता है।

यह कथन कि नागरिक चार्टर “नागरिकों का, नागरिकों के द्वारा और नागरिकों के लिए” होना चाहिए, इस बात को स्पष्ट करता है कि यह केवल विभागीय औपचारिक दस्तावेज न रहे। इसमें नागरिकों की आवश्यकताएँ झलकनी चाहिए, इसका निर्माण नागरिकों की भागीदारी से होना चाहिए और इसका अंतिम उद्देश्य समयबद्ध, पारदर्शी तथा जवाबदेह सेवा वितरण सुनिश्चित करना होना चाहिए। यह विचार उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और जनसंख्या-बहुल राज्य के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है।

मुख्य भाग: नागरिक-केंद्रित शासन के साधन के रूप में नागरिक चार्टर

फ्लो चार्ट: नागरिक चार्टर का अर्थ

नागरिक चार्टर

नागरिकों का

नागरिकों की वास्तविक
आवश्यकताओं, अधिकारों
और अपेक्षाओं पर आधारित

नागरिकों के द्वारा

परामर्श, प्रतिक्रिया
और जन-भागीदारी
के माध्यम से तैयार

नागरिकों के लिए

समयबद्ध, पारदर्शी
और जवाबदेह
सेवा वितरण सुनिश्चित

मुख्य उद्देश्य: उत्तरदायी, पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-मित्र शासन। 

1. “नागरिकों का”

नागरिक चार्टर नागरिकों की वास्तविक समस्याओं और अपेक्षाओं पर आधारित होना चाहिए। इसमें विभाग द्वारा दी जाने वाली सेवाएँ, पात्रता शर्तें, आवश्यक दस्तावेज, निर्धारित शुल्क, समय-सीमा, जिम्मेदार अधिकारी और शिकायत निवारण व्यवस्था स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश में नागरिकों को आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, पेंशन, राशन कार्ड, भू-अभिलेख, पुलिस सत्यापन, स्वास्थ्य सेवाओं और छात्रवृत्ति लाभ जैसी सेवाओं की बार-बार आवश्यकता होती है। इसलिए चार्टर को इन व्यावहारिक आवश्यकताओं को संबोधित करना चाहिए।

2. “नागरिकों के द्वारा”

नागरिक चार्टर तभी सार्थक बनता है, जब नागरिक इसके निर्माण और मूल्यांकन में भाग लेते हैं। नागरिक समाज संगठनों, स्थानीय निकायों, ग्राम सभाओं, शहरी वार्ड समितियों, महिलाओं, कमजोर वर्गों और वास्तविक सेवा-उपयोगकर्ताओं से परामर्श किया जाना चाहिए।

नागरिक भागीदारी के बिना चार्टर ऊपर से थोपी गई प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह जाता है। जन-प्रतिक्रिया, सामाजिक लेखा-परीक्षा और नागरिक रिपोर्ट कार्ड इसे अधिक यथार्थवादी, लोकतांत्रिक और जवाबदेह बना सकते हैं।

3. “नागरिकों के लिए”

नागरिक चार्टर का अंतिम उद्देश्य नागरिकों की सुविधा है। इसे सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता, प्रक्रिया में पारदर्शिता, अधिकारियों की जवाबदेही और शिकायत निवारण तक आसान पहुँच सुनिश्चित करनी चाहिए।

एक अच्छे चार्टर में अनावश्यक देरी पर क्षतिपूर्ति या दंड, अपील व्यवस्था, हेल्पलाइन नंबर तथा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रकार की पहुँच होनी चाहिए। यह दीवार पर लगा सजावटी नोटिस नहीं, बल्कि राज्य और नागरिकों के बीच एक जीवंत अनुबंध होना चाहिए।

उत्तर प्रदेश के विशेष संदर्भ में

उत्तर प्रदेश की जनसंख्या बहुत बड़ी है, ग्रामीण आधार व्यापक है, सामाजिक-आर्थिक विविधता अधिक है और जनता सार्वजनिक सेवाओं पर काफी निर्भर है। इसलिए सेवा वितरण में सुधार, भ्रष्टाचार, देरी और प्रशासनिक विवेकाधिकार को कम करने के लिए नागरिक चार्टर अत्यंत प्रासंगिक है।

  • ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाएँ: प्रमाण पत्रों और सार्वजनिक सेवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता।

  • जनसुनवाई पोर्टल: जन-शिकायत निवारण के लिए एक मंच।

  • लोकवाणी और CSC केंद्र: डिजिटल पहुँच से वंचित नागरिकों के लिए सहायक व्यवस्था।

  • कल्याणकारी योजनाओं का वितरण: पेंशन, छात्रवृत्ति, राशन, स्वास्थ्य और आवास योजनाओं के लिए समयबद्ध सेवा मानक आवश्यक।

  • स्थानीय शासन: ग्राम पंचायतें और नगरीय निकाय सेवा गुणवत्ता की निगरानी में सहयोग कर सकते हैं।

चुनौतियाँ और आगे की राह

कई पहलों के बावजूद जागरूकता की कमी, डिजिटल विभाजन, चार्टर का ठीक से प्रदर्शन न होना, निचले प्रशासनिक स्तरों पर देरी, भ्रष्टाचार, कमजोर निगरानी और क्षतिपूर्ति व्यवस्था का अभाव नागरिक चार्टर की प्रभावशीलता को कम करते हैं।

  • चार्टर सरल हिंदी में लिखा जाए और प्रत्येक कार्यालय में प्रदर्शित किया जाए।

  • सेवा मानक और समय-सीमा स्पष्ट रूप से लिखी जाए।

  • अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।

  • ऑनलाइन और ऑफलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत किया जाए।

  • नियमित प्रतिक्रिया, सामाजिक लेखा-परीक्षा और नागरिक संतुष्टि सर्वेक्षण कराए जाएँ।

निष्कर्ष

इस प्रकार, नागरिक चार्टर प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-मित्र बनाने का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। यह तभी सार्थक होता है, जब इसमें नागरिकों की आवश्यकताएँ प्रतिबिंबित हों, इसका निर्माण नागरिकों की भागीदारी से हो और यह नागरिकों की सुविधा के लिए कार्य करे।

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में, जहाँ लाखों लोग प्रमाण पत्रों, कल्याणकारी योजनाओं, भू-अभिलेखों, स्वास्थ्य, शिक्षा और शिकायत निवारण जैसी सार्वजनिक सेवाओं पर निर्भर हैं, एक प्रभावी नागरिक चार्टर उत्तरदायी और सहभागी शासन का सशक्त उपकरण बन सकता है।

मुख्य विचार: नागरिक चार्टर विभागीय औपचारिकता नहीं होना चाहिए; यह राज्य द्वारा नागरिकों की गरिमा, गति और जवाबदेही के साथ सेवा करने का जीवंत वादा होना चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion)

 

Syllabus Anchoring
General Studies - V (Uttar Pradesh Special) → Good Governance
सामान्य अध्ययन - V (उत्तर प्रदेश विशेष) पाठ्यक्रम → सुशासन
Good Governance, Eradication of Corruption, Lokayukta, Citizen Charters, E-Governance, Right to Information, Redressal Policy.
सुशासन, भ्रष्टाचार निवारण, लोकायुक्त, सिटीजन चार्टर, ई-गवर्नेंस, सूचना का अधिकार, शिकायत निवारण नीति।
Asked in: 2025 (1 PYQ)
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